गाँधीजी की हत्या, नाथूभाई की मनोव्यथा और नहेरु की राजनीती | Gandhiji Ki Hatya, Nathubhai Ki Manovyatha Aur Nehru Ki Rajniti | Part #3 - Bagavat Of Anonymous

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Tuesday, June 25, 2019

गाँधीजी की हत्या, नाथूभाई की मनोव्यथा और नहेरु की राजनीती | Gandhiji Ki Hatya, Nathubhai Ki Manovyatha Aur Nehru Ki Rajniti | Part #3

गांधीजी को पब्लिक में चलेंगे करना चाहिए था की " आप पाकिस्तान जा कर आंदोलन करो हम आपको बॉर्डर तक छोड़ने आएंगे वहाँ से आप अकेले चले जाना आप तो महात्मा है आप को प्रोटेक्शन की क्या जरुरत वह जा कर आंदोलन करना, जब तक पाकिस्तान भारतीयों कि लूटी हुई सम्पति वापस न कर दे, तब तक आप वहाँ आंदोलन करते रहना और तब तक वापस आने की भी कोई जरूरत नहीं है ." 


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तो इस तरह गांधीजी को चेलेंज कर के उनको एक्सपोज़ करना चाहिए था की वो कितने बड़े ढोंगी थे.नाथूभाई को इसी तरह गांधीजी को एक्सपोज़ करना चाहिए था.नाथूभाई ने जो गांधीजी की हत्या की उस से Backfire हुआ. इस से ये हुआ की गांधीजी के नाम पर कमाने वाले जवाहर नहेरु जैसे लोगोंने गांधीजी को रातोरात राष्ट्रपिता बना दिया बना दिया एक Sympathy Wave बना दी. गाँधी जी के नाम पर नहेरु ने अपनी राजनीती की रोटीआं सेकि.

अब हम गांधीजी की बात का विश्लेषण करे तो उनके कहने का मतलब ये था की 35 करोड़ भारतीयों से 1.60 रुपया छीनो ओर टोटल 55 करोड़ जमा करके पाकिस्तान को 55 करोड़ दे देंगे.यहाँ 1.60 रुपया आपको चिल्लर लगेगा लेकिन उस ज़माने का एक 1.60 रुपया आज के हुए 500 रुपया.ये नंबर हमें सोने के भाव से पता लगता है.उस समय सोने की किम्मत थी 100 रुपया/१० ग्राम के और आज सोने का भाव है 30000-35000 रुपया/१० ग्राम.तो हम यहाँ 500 मान के चलते है की उस समय का 1 रुपया यानी आज के 500 रुपया.आज के समय में 500 रुपया कुछ नहीं लगेंगे लेकिन उस ज़माने में देखे तो सामान्य भारतीय नागरिक की मजदूरी चवन्नी यानि सिर्फ 25 पैसे होते हे.मतलब सिर्फ एक आम आदमी को 1.60 रुपया देने के लिए 7 दिन यानि एक हफ़्ता मजदूरी करेंगे तब जाकर 1.60 रुपया जमा हो पाएंगे.

अब वही उदहारण वापस दोहराता हु की आपके दूरके रिस्तेदार को गुंडो ने बहुत मारा उनकी सारी सम्पति लूट ली और वो आपसे मदद मांगने आता है तो कोई सेक्युलर लिबरल आकर आपसे कहता है की आप सब मुझे 500-500 रुपया दो मुझे उस गुंडो को 5000 रुपया की मदद करनी है.ये सुन ने के बाद आपके मन में क्या प्रतिक्रिया होगी बिलकुल वही प्रतिक्रिया 35 करोड़ भारतीयों के मन में हुई.और फिर लोगोने गांधीजी का बहिस्कार करना शरू कर दिया.लोगोने करोलबाग में जो गांधीजी का आश्रम था उसको तोड़ दिया और धमकी दी की " अगर गांधीजी वापस आये तो उनके हाथ पाव तोड़ देंगे." इस से ड़र कर गांधीजी करोल बाग़ में जाकर छुप गए.

उस समय दो काम सफलतापूर्वक हो जाते तो नाथूभाई को गांधीजी की हत्या करने की कोई जरूरत नहीं ही. पहला ये की पार्लियामेंट में एक प्रस्ताव पास हो जाना चाहिए था की पाकिस्तान को 55 करोड़ किसी भी परिस्थिति में नहीं दिए जायेंगे. दूसरा ये की गांधीजी ने जब पाकिस्तान को 55 करोड़ देने का समर्थन किया उसी समय गांधीजी को देशद्रोह के आरोप में अरेस्ट कर लेना चाहिए था.क्योकि पाकिस्तान के साथ उस समय हमारा युद्ध चल रहा था.उस समय पाकिस्तान हमारे देश का दुश्मन था और दुश्मन की मदद करना देशद्रोह ही हुआ.अगर ऐसा होआ तो नाथूभाई गांधीजी की हत्या कभी नहीं करते.

ये 55 करोड़ का नंबर कैसे आया तो जब भारत पाकिस्तान का बटवारा हुआ तो सभी चीज बाटी गयी दोनों देश के बीच.जो जो चीज बाट सकते थे बो सब बात दी लेकिन कुछ चीज थी जो बाटी नहीं जा सकती थी जैसे Buildings ,Rivers...

तो हुआ क्या की जो सम्पत्ति नहीं बाट सकते थे उनकी की किम्मत का हिसाब लगाया गया और आखिर में परिणाम आया की पाकिस्तान भारत को 300 करोड़ देगा और भारत पाकिस्तान को 75 करोड़ देगा.

अगर कोई समझदार इंसान होगा तो वो यही कहेगा की पाकिस्तान 300 करोड़ में से 75 करोड़ काट के बाकि के 225 करोड़ पाकिस्तान भारत को दे दे.लेकिन यहाँ गांधीजी की नासमझी कहे या उनका कोई षड़यंत्र यहा गांधीजी ने क्या कहा की भारत पहले पाकिस्तान को 75 करोड़ देगा और फिर बाद में पाकिस्तान भारत को 300 करोड़ देगा.और इसी लिए भारत ने पाकिस्तान को 75 करोड़ में से 20 करोड़ पहले से ही दे दिए.

इसी बात से नाथूभाई को और 35 करोड़ भारतीयों को दर लग रहा था की पाकिस्तान को 20 करोड़ दिए तो उसने कश्मीर में युद्ध में लाखो लोगो को मर डाला.अगर और 55 करोड़ देंगे तो और नरसंहार करेगा.अगर आप हमारे देश के किसी भी साल का बजट उठाकर देखेंगे तो उस में लिखा होगा की हमें पाकिस्तान से 300 करोड़ वापस लेने है और उसने अभी तक नहीं चुकाए है.हमें ये 300 करोड़ 1948 में लेने थे उस पर व्याज को ऐड नहीं किया है.

नाथुभाई की मनस्थिति उस समय क्या थी वही उदाहरण वापस यहाँ कहता हु की आप के रिस्तेदार को गुंडो ने मारा लुटा और वो आपके परिवार के पास आया मदद मांगने के लिए लेकिन कोई सेक्युलर आकर आपके से कहता है की आप सब 500-500 रुपया मुझे दो मुझे उस गुंडो को 5000 की मदद करनी है.इस समय जो आपके मन में जो प्रतिक्रिया होगी वही प्रतिक्रिया नाहुभाई के मन में हुई.

और नाथूभाई ने यही मनोव्यथा में गाँधीजी की हत्या की.जिसकी वजह से नहेरु ने लगातार तीन बार इलेक्शन जीते और Congress ने 70 साल तक राज किया राजशाही की तरह.

धन्यवाद्,
जय माँ भारती,
जय हिन्द,
वन्दे मातरम.



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